झारखंड के देवघर ज़िले की सरकारी स्कूल शिक्षिका श्वेता शर्मा ने पूरे राज्य का नाम रोशन किया है। उन्हें उनके नवाचारपूर्ण शिक्षण तरीकों की वजह से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया है। इस साल देशभर से 45 शिक्षकों को यह सम्मान मिलेगा और श्वेता शर्मा झारखंड की एकमात्र प्रतिनिधि होंगी जिन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा 5 सितंबर को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा। 5 सितंबर को पूरे देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है और इसी दिन हर साल शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले शिक्षकों को यह राष्ट्रीय सम्मान दिया जाता है।
श्वेता शर्मा की शिक्षण यात्रा वर्ष 2004 में शुरू हुई थी। उन्होंने कुशमहां के एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षिका के रूप में अपनी सेवा आरंभ की थी। शुरुआत से ही उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को केवल किताबों तक सीमित न रखकर, खेल-आधारित शिक्षण पद्धतियों और बच्चों के साथ आत्मीय जुड़ाव पर ध्यान दिया। यही कारण है कि वे धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुईं। श्वेता ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढाँचे को स्थानीय कला और संस्कृति के साथ जोड़ने का प्रयास किया। इसी सोच से उन्होंने एक विशेष शिक्षण किट तैयार किया, जिसका नाम रखा – ‘अबुआ जादुई पिटारा’ (हमारा जादुई डिब्बा)।
इस पिटारे में सोहराय कला, बैद्यनाथधाम की पेंटिंग्स, कपड़े की गुड़िया, और पारंपरिक वाद्य जैसे झांझर और डफली शामिल किए गए। इस शिक्षण किट ने बच्चों की पढ़ाई को रोचक बना दिया और निर्णायक मंडल ने भी इसे बहुत सराहा।
“यह झारखंड के लिए गर्व का क्षण है। श्वेता शर्मा का चयन इस बात का प्रमाण है कि देवघर में कितना प्रतिभाशाली और समर्पित शिक्षक वर्ग मौजूद है। हमें उम्मीद है कि हमारे शिक्षक इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की परंपरा को आगे बढ़ाते रहेंगे।” राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 की घोषणा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने की है। विजेताओं को राष्ट्रपति के हाथों से ₹50,000 की नकद राशि, एक प्रशस्ति पत्र और रजत पदक प्रदान किया जाएगा।