आज पवित्र बृहस्पतिवार के अवसर पर ख्रीस्तीय समुदाय ने प्रभु येसु ख्रीस्त के “अंतिम भोज” की स्मृति को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया। इसी ऐतिहासिक घटना के साथ “पवित्र यूखरिस्ट” और पुरोहिताभिषेक की स्थापना मानी जाती है, जिसके तहत आज भी पुरोहित पवित्र मिस्सा के माध्यम से ईश्वर को अर्पण करते हैं।
ख्रीस्तीय परंपरा में इस दिन से “पास्कल त्रिदुम” यानी प्रभु येसु के अंतिम तीन दिनों की शुरुआत होती है, जो गुड फ्राइडे और ईस्टर तक जारी रहती है। मान्यता है कि प्रभु येसु ने मानवता के पापों के प्रायश्चित के लिए क्रूस पर बलिदान दिया और मृत्यु पर विजय प्राप्त कर पुनर्जीवित हुए।
इस अवसर पर प्रभु येसु द्वारा अपने चेलों के पैर धोने की परंपरा को भी दोहराया गया, जो सेवा, विनम्रता और प्रेम का प्रतीक है। इसी क्रम में राँची महाधर्मप्रांत के आर्चबिशप विन्सेंट आइंड ने राँची पारिश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों के पैर धोकर समाज को सेवा और समानता का संदेश दिया।
इस आयोजन के माध्यम से “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करो” का संदेश पुनः लोगों के बीच सशक्त रूप से प्रस्तुत किया गया।

