क्या बिजली के पोल पर के ये विज्ञापन भी बिजली विभाग की आय का स्रोत हैं?
यदि विभाग को इससे राजस्व प्राप्त होता है, तो फिर उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ाने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
और यदि ये विज्ञापन विभाग की अनुमति से नहीं लगाए जा रहे, तो बिना अनुमति बिजली के पोलों का उपयोग कैसे हो रहा है?

