राँची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आरक्षण का लाभ लेकर एमबीबीएस में नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्रों की सत्यता की जाँच शुरू कर दी गई है। रिम्स प्रबंधन ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों को विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और उनकी वैधता की जाँच कराने का अनुरोध किया है।
उपायुक्त संबंधित अंचलों के माध्यम से वंशावली एवं अभिलेखों के आधार पर प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराएंगे। जाँच रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि विद्यार्थियों का नामांकन वैध है या नहीं। रिम्स में प्रत्येक वर्ष लगभग 75 विद्यार्थी आरक्षण का लाभ लेकर एमबीबीएस में प्रवेश लेते हैं।
रिम्स प्रबंधन ने यह कदम वर्ष 2025 में सामने आए फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों के बाद उठाया है। उस वर्ष एमबीबीएस में नामांकन लेने वाले दो विद्यार्थियों (एक छात्र और एक छात्रा) तथा एक बीडीएस छात्रा का जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया था। इसके बाद तीनों का नामांकन रद्द कर दिया गया था।
वहीं, सीआईडी भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन लेने के मामले की जाँच कर रही है। सीआईडी की टीम रिम्स पहुँचकर संबंधित विद्यार्थियों के नामांकन से जुड़े दस्तावेज जब्त कर चुकी है। अब आरक्षण के आधार पर नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्रों का व्यापक सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगाई जा सके।

