राँची नगर निगम ने शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को प्रभावी रूप से लागू करने और स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण को बढ़ावा देने के लिए सोमवार को बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। अपर नगर आयुक्त संजय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने तथा पृथक किए गए कचरे को ही निगम की गाड़ियों को सौंपने का निर्देश दिया गया।
अपर नगर आयुक्त ने साफ कहा कि किसी भी स्थिति में मिक्स कूड़ा स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी संस्थान द्वारा बार-बार मिश्रित कचरा दिया जाता है तो संबंधित संस्थान का कूड़ा उठाव बंद कर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि झिरी स्थित GAIL (India) Limited द्वारा संचालित 150 टीपीडी क्षमता वाले सीबीजी प्लांट को फिलहाल प्रतिदिन करीब 80 टन गीला कचरा उपलब्ध कराया जा रहा है। इसे इस माह के अंत तक 100 टन और अगले माह तक 150 टन प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। गीले कचरे से बायो-सीएनजी और जैविक खाद का उत्पादन किया जा रहा है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम-2026 पूरे देश में 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है। इसके तहत हर नागरिक, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान के लिए अपने स्तर पर कचरे को अलग-अलग रखना अनिवार्य होगा। वहीं, प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटरों को वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निपटान और प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी।
चार रंगों के बिन में होगा कचरे का वर्गीकरण
हरा बिन: गीला कचरा, रसोई अपशिष्ट, फल-सब्जियों के छिलके और अन्य जैविक कचरा।
नीला बिन: प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच और अन्य रिसाइक्लेबल सामग्री।
लाल बिन: डायपर, सैनिटरी नैपकिन और अन्य सैनिटरी वेस्ट।
काला बिन: बल्ब, ट्यूबलाइट, पेंट सामग्री, बैटरी, दवाइयां, ई-वेस्ट और अन्य खतरनाक घरेलू अपशिष्ट।

