राँची के ऐतिहासिक आड्रे हाउस में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से आयोजित सात दिवसीय ‘आदि बाजार’ और ‘आदि चित्रा उत्सव’ लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय हस्तशिल्प, हस्तकला और पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देना है। देश के असम, नागालैंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और बिहार समेत कई राज्यों से आए कलाकार अपने-अपने स्टॉल के माध्यम से हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री कर रहे हैं।
मेले में हाथ से बुने वस्त्र, बांस और लकड़ी की कलाकृतियां, पारंपरिक आभूषण, जनजातीय पेंटिंग और प्राकृतिक रंगों से बने परिधान विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। कलाकारों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से उनकी कला को नई पहचान मिलती है और विभिन्न जनजातीय समुदायों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी होता है। यह उत्सव न केवल खरीदारी का मंच है, बल्कि जनजातीय जीवनशैली और विरासत को करीब से जानने का अवसर भी दे रहा है। मेले का आयोजन 26 फरवरी तक होगा और यह प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 9:00 बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा।

