मंदार की थाप जैसे दिल की धड़कनों से ताल मिला रही हो, हवा में घुली मिट्टी की भीनी खुशबू और झमाझम बारिश की बूंदें इस पल को और भी जीवंत बना रही हैं। झूमते कदम, रंग-बिरंगे परिधानों में सजी परंपरा, और हर चेहरे पर छलकता उत्साह—सरहुल की यह झांकी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति का गहरा संवाद है।
राँची के अल्बर्ट एक्का चौक पर यह दृश्य मानो समय को थाम लेता है—जहाँ हर बूंद, हर थाप और हर मुस्कान एक कहानी कहती है। कैमरे की नज़र से कैद यह झलक, उस ऊर्जा और सौंदर्य को महसूस कराती है जो शब्दों से कहीं अधिक गहराई से दिल को छू जाती है।

