स्विट्जरलैंड के जिनेवा में 13 से 17 जुलाई तक आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UN Human Rights Council) के अंतर्गत इंडिजेनस समुदाय के अधिकारों पर एक्सपर्ट मैकेनिज्म (EMRIP) के 19वें अधिवेशन में झारखंड के खूंटी निवासी अनुपम पूर्ति ने मुंडा आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।
दुनिया भर से करीब 600 प्रतिभागियों की मौजूदगी वाले इस अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन में अनुपम पूर्ति ने तीन दिनों तक रुम्बुल द्वारा मुंडा समुदाय की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह रुम्बुल के माध्यम से मुंडा भाषा और पारंपरिक गीतों के पुनरुत्थान, फॉरेस्ट वॉक, लैंड-बेस्ड लर्निंग और सुकान बुरु ट्राइबल इमर्शन प्रोग्राम जैसी पहलें आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य कर रही हैं।
इस अधिवेशन का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराना तथा संयुक्त राष्ट्र आदिवासी अधिकार घोषणा (UNDRIP) के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देना है।
अनुपम पूर्ति पेशे से ग्राफिक डिज़ाइनर होने के साथ-साथ एक संस्कृतिकर्मी, ट्राइबल डिज़ाइन फोरम के सदस्य और रुम्बुल के सह-संस्थापक भी हैं। इससे पहले वे 2019 में जर्मनी, 2023 में कंबोडिया, 2024 में न्यूज़ीलैंड और 2025 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी झारखंड के आदिवासी समुदायों से जुड़े अपने कार्यों को प्रस्तुत कर चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र के इस प्रतिष्ठित मंच पर झारखंड की आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना राज्य के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। अनुपम पूर्ति की यह उपलब्धि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

